बजट 2026 से पहले MSME सेक्टर के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। उद्योग संगठन PHDCCI (PHD Chamber of Commerce and Industry) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने सस्ते लोन और ब्याज छूट (Interest Subvention) को लेकर एक अहम प्रस्ताव रखा है।
यहाँ इस खबर की मुख्य बातें (Key Highlights) हैं:
1. किसने की मांग?
यह मांग प्रमुख उद्योग निकाय PHDCCI ने की है। उन्होंने वित्त मंत्रालय को अपना प्री-बजट प्रस्ताव (Pre-budget proposal) सौंपा है, जिसमें छोटे उद्योगों (MSMEs) को राहत देने की बात कही गई है।
2. क्या है मुख्य मांग (2% ब्याज छूट)?
PHDCCI ने सरकार से मांग की है कि ब्याज सबवेंशन स्कीम (Interest Subvention Scheme) को फिर से शुरू किया जाए।
* प्रस्ताव: नए और इंक्रीमेंटल (बढ़े हुए) लोन पर 2% की ब्याज छूट दी जाए।
* तर्क: उद्योग संगठन का कहना है कि भारत में ब्याज दरें अन्य देशों के मुकाबले काफी ज्यादा हैं। इस छूट से छोटे व्यापारियों की लागत कम होगी और वे विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धा कर पाएंगे।
3. अन्य प्रमुख सुझाव
ब्याज छूट के अलावा, संगठन ने कुछ और सुझाव भी दिए हैं:
* मुद्रा लोन (Mudra Loan): मुद्रा लोन की सीमा (limit) बढ़ाई जाए ताकि बढ़ती महंगाई और जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त फंड मिल सके।
* एक्सपोर्ट क्रेडिट: निर्यातकों के लिए 'इंटरेस्ट इक्वलाइजेशन स्कीम' (Interest Equalization Scheme) को भी वापस लाने या विस्तार देने की मांग की गई है।
* स्टार्टअप्स के लिए: स्टार्टअप्स को फंड ऑफ फंड्स (Fund of Funds) के जरिए सस्ती इक्विटी फंडिंग उपलब्ध कराने का सुझाव भी दिया गया है।
निष्कर्ष:
बजट 2026 (जो 1 फरवरी को पेश होने की उम्मीद है) से पहले यह मांग काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अगर सरकार इसे मान लेती है, तो छोटे और मझोले व्यापारियों को कर्ज लेने में बड़ी राहत मिल सकती है।
