एपिसोड 1: लालच (Greed)
मुख्य किरदार:
- आर्यन शर्मा (35): मुंबई का एक महत्वाकांक्षी स्टॉक ब्रोकर। वह बाहर से अमीर दिखता है, लेकिन अंदर से भारी कर्ज़ में डूबा हुआ है। उसकी शादी टूटने की कगार पर है क्योंकि वह सिर्फ पैसों के पीछे भागता है।
कहानी की शुरुआत: अंधेरा और कर्ज
रात के 2 बज रहे हैं। मुंबई की एक पॉश हाई-राइज बिल्डिंग के फ्लैट में आर्यन पसीने से तर-बतर बैठा है। उसके सामने लैपटॉप खुला है, जिसमें लाल रंग में गिरते हुए शेयर मार्केट के ग्राफ दिख रहे हैं। उसे कल तक 50 लाख रुपये का इंतजाम करना है, वरना वह बर्बाद हो जाएगा।
तभी डोरबेल बजती है। इतनी रात को कोई नहीं आता। वह डरते-डरते दरवाजा खोलता है। बाहर कोई नहीं है, सिर्फ एक पुराना, भारी लकड़ी का संदूक रखा है। उस पर अजीब सी नक्काशी है और कोई ताला नहीं है। आर्यन उसे अंदर खींच लाता है।
मध्य भाग: चमत्कार और कीमत
आर्यन संदूक खोलने की कोशिश करता है, लेकिन वह नहीं खुलता। हताश होकर वह सो जाता है।
अगली सुबह, उसकी नींद एक धातु के गिरने की आवाज़ से खुलती है। वह देखता है कि संदूक का ढक्कन थोड़ा सा खुला है। उसके पास फर्श पर एक पुराना, भारी सोने का सिक्का पड़ा है। आर्यन हैरान रह जाता है। वह उसे सुनार के पास ले जाता है। सुनार बताता है कि यह बहुत पुराना और कीमती है, इसकी कीमत लाखों में है।
आर्यन की खुशी का ठिकाना नहीं रहता। वह अपना तत्काल कर्ज चुका देता है।
उसे समझ आ जाता है कि संदूक रात में ही खुलता है। अगली रात, वह जागकर इंतजार करता है। ठीक 3 बजे, संदूक से हल्की खड़खड़ाहट होती है और एक और सोने का सिक्का बाहर गिरता है। आर्यन लालच में अंधा हो जाता है। वह हर रात जागता है और सिक्के इकट्ठे करता है।
लेकिन, एक कीमत चुकानी पड़ रही है।
शुरुआत में, आर्यन छोटी-छोटी बातें भूलने लगता है। जैसे कि उसने अपनी गाड़ी की चाबी कहाँ रखी, या आज कौन सा दिन है। उसे लगता है कि यह नींद की कमी और तनाव के कारण हो रहा है।
धीरे-धीरे भूलने की बीमारी बढ़ती जाती है।
- एक दिन वह अपने सबसे अच्छे दोस्त का नाम भूल जाता है।
- अगले हफ्ते, उसे याद नहीं रहता कि उसका पसंदीदा खाना क्या था।
- एक महीने बाद, जब उसकी पत्नी (जो उससे अलग रह रही है) उसे फोन करती है, तो उसे उसकी आवाज़ पहचानने में कुछ सेकंड लगते हैं।
हर सोने के सिक्के के बदले, संदूक उसकी एक कीमती याद (memory) को हमेशा के लिए मिटा रहा है।
क्लाइमेक्स: खोखलापन
तीन महीने बीत चुके हैं। आर्यन अब मुंबई का सबसे अमीर आदमी बन चुका है। उसका पेंटहाउस सोने के सिक्कों और महंगे सामानों से भरा पड़ा है।
एक रात, वह सिक्कों के ढेर के बीच बैठा है। उसके हाथ में एक फोटो फ्रेम है। फोटो में एक हंसती हुई औरत और एक छोटा बच्चा है (उसकी पत्नी और बेटा)। आर्यन उस फोटो को घूरता रहता है। उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं है, सिर्फ खालीपन है।
वह खुद से पूछता है, "ये लोग कौन हैं?"
उसे अब यह भी याद नहीं कि उसने यह सब पैसा क्यों कमाया था। उसे अपना नाम तक याद करने में संघर्ष करना पड़ता है। वह सोने के ढेर पर बैठा एक जिंदा लाश बन चुका है, जिसके पास दुनिया की हर दौलत है, लेकिन उसे भोगने के लिए कोई यादें या रिश्ते नहीं बचे।
अंत: संदूक का सफर जारी
कैमरा धीरे-धीरे आर्यन के खाली, भावहीन चेहरे से दूर जाता है।
हम देखते हैं कि संदूक का ढक्कन अपने आप बंद हो जाता है। एक ज़ोरदार 'क्लिक' की आवाज़ आती है। संदूक का काम यहाँ पूरा हो गया है।
अगले सीन में, हम देखते हैं कि वही संदूक एक कबाड़ वाले की दुकान पर पड़ा है। एक नई, खूबसूरत लेकिन घमंडी फिल्म अभिनेत्री की नज़र उस पर पड़ती है। वह कहती है, "कितना एंटीक पीस है, मैं इसे अपने बंगले के लिए ले जाऊँगी।"