बजट 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से क्रिप्टो निवेशकों की उम्मीदें - टीडीएस में भारी कटौती और टैक्स राहत की मांग

 

आगामी केंद्रीय बजट से पहले, भारतीय क्रिप्टोकरेंसी निवेशक और इंडस्ट्री के दिग्गज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से बड़ी राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। पिछले कुछ वर्षों में सख्त कर नियमों (Tax Rules) के कारण मुश्किलों का सामना कर रहे क्रिप्टो बाजार ने सरकार के सामने कुछ प्रमुख मांगे रखी हैं।


यहाँ क्रिप्टो निवेशकों द्वारा वित्त मंत्री से मांगी गई प्रमुख राहतों का विवरण दिया गया है:

1. टीडीएस (TDS) में भारी कटौती की मांग

निवेशकों और क्रिप्टो एक्सचेंजों की सबसे बड़ी मांग 'स्रोत पर कर कटौती' (TDS) को कम करने की है।

 * वर्तमान नियम: अभी हर क्रिप्टो ट्रांजेक्शन पर 1% TDS कटता है।

 * मांग: इंडस्ट्री चाहती है कि इसे घटाकर 0.01% कर दिया जाए।

 * वजह: 1% टीडीएस के कारण डे-ट्रेडर्स और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स की पूंजी (Capital) ब्लॉक हो जाती है, जिससे बाजार में लिक्विडिटी कम हो गई है। इसका एक बड़ा नुकसान यह हुआ है कि कई भारतीय निवेशक विदेशी एक्सचेंजों पर शिफ्ट हो गए हैं। टीडीएस कम होने से वे वापस भारतीय प्लेटफॉर्म पर लौट सकते हैं।

2. 30% फ्लैट टैक्स की समीक्षा

क्रिप्टो से होने वाली कमाई पर लगने वाला टैक्स भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।

 * वर्तमान नियम: वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) से होने वाले मुनाफे पर फ्लैट 30% टैक्स लगता है, जो देश में सबसे ऊंचे टैक्स स्लैब के बराबर है।

 * मांग: निवेशक चाहते हैं कि क्रिप्टो को भी शेयर बाजार (इक्विटी) या अन्य संपत्तियों की तरह माना जाए और टैक्स की दरें कम की जाएं।

3. घाटे को सेट-ऑफ (Set-off) करने की अनुमति

यह निवेशकों की सबसे दर्दनाक समस्याओं में से एक है।

 * वर्तमान नियम: अभी अगर आपको एक क्रिप्टो में नुकसान (Loss) होता है और दूसरे में मुनाफा (Profit), तो आप नुकसान की भरपाई मुनाफे से नहीं कर सकते। आपको मुनाफे पर पूरा टैक्स देना होगा, भले ही कुल मिलाकर आप घाटे में हों।

 * मांग: निवेशक चाहते हैं कि शेयर बाजार की तरह क्रिप्टो में भी नुकसान को मुनाफे के साथ एडजस्ट (Set-off) करने और घाटे को अगले साल के लिए कैरी फॉरवर्ड (Carry Forward) करने की अनुमति मिले।

4. विदेशी एक्सचेंजों पर नकेल और समान अवसर

भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंज चाहते हैं कि सरकार विदेशी एक्सचेंजों के लिए भी कड़े नियम बनाए या भारतीय एक्सचेंजों को राहत दे ताकि 'लेवल प्लेइंग फील्ड' (समान अवसर) मिल सके। सख्त टैक्स के कारण भारतीय प्लेटफॉर्म्स का वॉल्यूम काफी गिरा है।

निष्कर्ष

क्रिप्टो इंडस्ट्री का मानना है कि अगर सरकार ये राहत देती है, तो न सिर्फ निवेश बढ़ेगा बल्कि सरकार के लिए टैक्स कलेक्शन में भी पारदर्शिता आएगी। अब सभी की निगाहें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण पर टिकी हैं कि क्या वे इस बार डिजिटल एसेट निवेशकों को कोई खुशखबरी देती हैं या नहीं।

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